LAW'S VERDICT

डबरा नगर पालिका में अध्यक्ष और सीएमओ कर रहे भ्रष्टाचार!


हाईकोर्ट ने कहा- आरोपों की शिकायत पर कार्रवाई करे लोकायुक्त 

ग्वालियर। नगर पालिका परिषद डबरा में अध्यक्ष और सीएमओ द्वारा कथित तौर पर किये जा रहे भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे मामलों में लोकायुक्त ही सक्षम मंच है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस अनिल वर्मा की डिवीज़न बेंच ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ताओं को विस्तृत शिकायत के साथ लोकायुक्त से संपर्क करने का निर्देश दिया है। साथ ही लोकायुक्त एसपी को भी निर्देश दिए कि शिकायत मिलने पर 6 सप्ताह के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई भी की जाए। 

जमकर कर रहे पद का दुरूपयोग

यह जनहित याचिका डबरा नगर पालिका की पार्षद सुनीता देवी राजौरिया और नवलिआ खान की ओर से दाखिल की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और नगर पालिका अध्यक्ष
अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और इससे राज्य के खजाने को नुकसान पहुंच रहा है। याचिका में मांग की गई थी कि प्राथमिक जांच कराई जाए, जांच पूरी होने तक अधिकारियों को पद से हटाया जाए और दोषी पाए जाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

पहले भी की गई थी शिकायत

याचिकाकर्ताओं की और से अधिवक्ता प्रकाश बरारु ने दलील दी कि इस संबंध में कलेक्टर, जिला ग्वालियर को शिकायत दी थी और उसकी प्रति मध्यप्रदेश लोकायुक्त को भी भेजी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं  राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर व शाश्कीय अधिवक्ता सोहित मिश्रा, कार्तिक करारा ने दलील दी कि इस तरह के मामलों के लिए सीधे लोकायुक्त जाना चाहिए। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही Kanhaiyalal Vishwakarma बनाम राज्य शासन के मामले में यह स्पष्ट कर चुकी है।

करेंगे शिकायत, पर जल्द हो कार्रवाई 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे लोकायुक्त के समक्ष विस्तृत प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी चिंता जल्द सुनवाई और कार्रवाई को लेकर है। इस पर कोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सभी दस्तावेजों सहित लोकायुक्त को विस्तृत शिकायत दें। शिकायत पर लोकायुक्त कार्यालय कानून के अनुसार कार्रवाई करे। यदि संज्ञेय अपराध बनता है तो SP लोकायुक्त एवं अन्य एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए जाएं। पूरी प्रक्रिया 6 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।  

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